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पंचांग की जानकारी

Panchang guides

हर पन्ना एक चीज़ समझाता है: वह क्या है, कैसे गिनी जाती है, और शहर बदलने पर क्यों बदलती है। साथ में आज की गणना की तालिका है।

पंचांग
पंचांग के पाँच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण। हर अंग क्या नापता है, दिन सूर्योदय से क्यों गिना जाता है, और हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है।
तिथि
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकलता है। एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं; दिन की तिथि वह है जो सूर्योदय पर चल रही हो।
नक्षत्र
नक्षत्र आकाश के sidereal घेरे के 27 बराबर भाग हैं, हर भाग 13°20′ का। एक नक्षत्र लगभग 21 से 27 घंटे चलता है; दिन का नक्षत्र सूर्योदय वाला होता है।
राहु काल
राहु काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार से तय होता है। इसलिए हर शहर और मौसम में इसका समय अलग होता है।
चौघड़िया
चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) के आठ-आठ बराबर हिस्से हैं। सात नाम, हर वार का क्रम और एक हिस्से की लंबाई।
अभिजित मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ है, सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच। लंबाई दिनमान के साथ बदलती है; बुधवार को समय नहीं छपता।
ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले वाली रात का 14वाँ मुहूर्त है। आज और कल का समय 12 शहरों में, और इसे अपने शहर के लिए गिनने का तरीका।
होरा
होरा दिन या रात का बारहवाँ भाग है। पहला होरा वार-स्वामी का होता है, फिर शनि-गुरु-मंगल-सूर्य-शुक्र-बुध-चंद्र के चक्र में अगला ग्रह आता है।
शब्दावली
पंचांग के पन्नों पर आने वाले शब्दों के सीधे अर्थ।