पंचांगNow

होरा क्या है

दिन के 12 और रात के 12 भाग, हर भाग का एक स्वामी ग्रह

Hora · Hora timings · Planetary hours

होरा समय का एक भाग है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 12 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को भी 12 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। इनमें से हर हिस्सा एक होरा है। इस तरह एक पंचांग दिन में कुल 24 होरा होते हैं।

हर होरा का एक स्वामी ग्रह माना जाता है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि। ये सात ग्रह एक तय क्रम में बारी-बारी से आते हैं। परंपरा में कई लोग किसी काम को शुरू करने का समय देखते हुए यह भी देखते हैं कि उस समय किस ग्रह का होरा चल रहा है।

होरा कैसे गिना जाता है

गिनती सूर्योदय से शुरू होती है, रात 12 बजे या सुबह 6 बजे से नहीं। तरीका सीधा है:

  1. सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय लीजिए। इसे दिनमान कहते हैं। दिनमान को 12 से भाग दीजिए। यह दिन के एक होरा की लंबाई है।
  2. पहला होरा सूर्योदय पर शुरू होता है। हर अगला होरा पिछले के खत्म होते ही शुरू हो जाता है। बारहवाँ होरा ठीक सूर्यास्त पर खत्म होता है।
  3. सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का समय रात्रिमान है। इसे भी 12 से भाग दीजिए। यह रात के एक होरा की लंबाई है। रात का पहला होरा सूर्यास्त पर शुरू होता है और बारहवाँ अगले सूर्योदय पर खत्म होता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त की परिभाषा, और पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिनने का नियम, गणना के तरीके में लिखे हैं। पंचांग के बाकी हिस्सों के लिए पंचांग क्या है देखिए।

राहु काल और चौघड़िया भी दिन को इसी तरह बाँटकर बनते हैं, पर आठ भागों में। होरा के लिए बारह भाग होते हैं। इसलिए दिन का एक होरा उसी दिन के एक चौघड़िया का ठीक दो-तिहाई होता है। रात में भी यही अनुपात रहता है।

होरा के ग्रह किस क्रम में आते हैं

सात ग्रह हमेशा इसी क्रम में आते हैं: शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र। चंद्र के बाद फिर शनि आता है, और क्रम ऐसे ही घूमता रहता है। अंग्रेज़ी में इस क्रम को अक्सर Chaldean order कहा जाता है।

क्रम किस ग्रह से शुरू होगा, यह वार तय करता है। सूर्योदय पर पहला होरा उस वार के स्वामी ग्रह का होता है। वार के नाम में ही उसका स्वामी छिपा है: रविवार का सूर्य (रवि यानी सूर्य), सोमवार का चंद्र (सोम यानी चंद्रमा), मंगलवार का मंगल, बुधवार का बुध, गुरुवार का गुरु, शुक्रवार का शुक्र और शनिवार का शनि।

नीचे की तालिका में पहले अपने वार की पंक्ति में "पहला होरा" देखिए। फिर "होरा का क्रम" देखिए। हर पंक्ति में वही सात ग्रह उसी क्रम में हैं, बस शुरुआत अलग ग्रह से होती है। सात होरा के बाद क्रम दोहराता है, इसलिए आठवाँ होरा फिर पहले वाले ग्रह का होता है।

सूर्योदय पर पहला होरा उस दिन के वार-स्वामी का होता है, फिर यही क्रम चलता है
वारपहला होराहोरा का क्रम
रविवारसूर्यसूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल
सोमवारचंद्रचंद्र → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध
मंगलवारमंगलमंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु
बुधवारबुधबुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र
गुरुवारगुरुगुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि
शुक्रवारशुक्रशुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य
शनिवारशनिशनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र

24 होरा के बाद अगले वार का स्वामी ही क्यों आता है

सात ग्रहों का एक पूरा चक्कर 7 होरा का होता है। एक पंचांग दिन में 24 होरा हैं। 24 में ऐसे तीन पूरे चक्कर (21 होरा) आते हैं, और 3 होरा बच जाते हैं। इसलिए अगले सूर्योदय तक क्रम, आज के पहले ग्रह से तीन कदम आगे पहुँच जाता है।

शनिवार से देखिए। सूर्योदय पर पहला होरा शनि का है। 8वाँ, 15वाँ और 22वाँ होरा भी शनि का है। 23वाँ होरा गुरु का है और 24वाँ मंगल का। अब अगला, यानी 25वाँ होरा सूर्य का बनता है। यही अगले सूर्योदय का पहला होरा है। और अगला दिन रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य है।

हर दिन यही होता है। क्रम में हर बार तीन कदम आगे चलिए: शनि → सूर्य → चंद्र → मंगल → बुध → गुरु → शुक्र, और फिर शनि। अब इन ग्रहों के वार पढ़िए: शनिवार, रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार। यह ठीक सप्ताह के वारों का क्रम है।

इसलिए होरा का क्रम दो दिनों के बीच कभी टूटता नहीं। engine हर सूर्योदय पर गिनती उस दिन के वार-स्वामी से शुरू करता है। ऊपर के हिसाब की वजह से यह नई शुरुआत ठीक उसी ग्रह पर पड़ती है जहाँ पिछले दिन का क्रम पहुँचा था।

इसी हिसाब से दो और बातें निकलती हैं। पहली, वार-स्वामी का होरा हर दिन चार बार आता है: दिन का पहला और आठवाँ, और रात का तीसरा और दसवाँ। दूसरी, रात का पहला होरा उस ग्रह का होता है जिसका वार चार दिन बाद आता है। जैसे रविवार की रात का पहला होरा गुरु का होता है, क्योंकि रविवार से चार दिन बाद गुरुवार है।

आज दिल्ली में कौन सा होरा कब है

नीचे की तालिका में दिल्ली के आज के सभी 24 होरा हैं। तालिका के ऊपर की पंक्ति में लिखा है कि आज दिन का एक होरा कितनी देर का है और रात का कितनी देर का। इन्हें 60 मिनट से मिलाकर देखिए। "दिन का होरा" वाले कॉलम में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के होरा हैं, और "रात का होरा" वाले कॉलम में सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के। देखिए कि दिन का पहला होरा आज के वार-स्वामी का है, और रात का पहला होरा क्रम में दिन के बारहवें होरा के ठीक बाद वाला ग्रह है।

दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026 · शनिवार · दिन का होरा 56 मिनट, रात का 1 घंटे 4 मिनट
क्रमदिन का होरासमयरात का होरासमय
1शनि6:27 AM – 7:24 AMबुध5:43 PM – 6:47 PM
2गुरु7:24 AM – 8:20 AMचंद्र6:47 PM – 7:50 PM
3मंगल8:20 AM – 9:16 AMशनि7:50 PM – 8:54 PM
4सूर्य9:16 AM – 10:13 AMगुरु8:54 PM – 9:58 PM
5शुक्र10:13 AM – 11:09 AMमंगल9:58 PM – 11:02 PM
6बुध11:09 AM – 12:05 PMसूर्य11:02 PM – 12:05 AM
7चंद्र12:05 PM – 1:01 PMशुक्र12:05 AM – 1:09 AM
8शनि1:01 PM – 1:58 PMबुध1:09 AM – 2:13 AM
9गुरु1:58 PM – 2:54 PMचंद्र2:13 AM – 3:17 AM
10मंगल2:54 PM – 3:50 PMशनि3:17 AM – 4:21 AM
11सूर्य3:50 PM – 4:47 PMगुरु4:21 AM – 5:24 AM
12शुक्र4:47 PM – 5:43 PMमंगल5:24 AM – 6:28 AM

रात के कुछ होरा आधी रात के बाद पड़ते हैं। वे भी उसी वार के क्रम में गिने जाते हैं, क्योंकि पंचांग में वार सूर्योदय पर बदलता है, आधी रात पर नहीं। जैसे सोमवार के सूर्यास्त के बाद, तारीख बदलने पर रात 2 बजे जो होरा चल रहा है, वह सोमवार के क्रम का ही है। मंगलवार का क्रम मंगलवार के सूर्योदय से शुरू होगा।

एक होरा कितनी देर का होता है

होरा को घंटा समझ लेना आसान है, पर यह घड़ी का 60 मिनट वाला घंटा नहीं है। दिन के 12 होरा आपस में बराबर होते हैं, और रात के 12 होरा भी। पर दिन और रात की लंबाई रोज़ बदलती है, इसलिए होरा की लंबाई भी रोज़ बदलती है।

2026 के पूरे साल की गणना में दिल्ली का दिन का होरा सबसे छोटा 22 दिसंबर को आता है, 52 मिनट का। सबसे लंबा 21 जून को आता है, 1 घंटे 10 मिनट का। रात के होरा में इसका उल्टा होता है: वह जून में सबसे छोटा (50 मिनट) और दिसंबर में सबसे लंबा (1 घंटे 8 मिनट) होता है। पूरे साल में सिर्फ़ 14 दिन ऐसे हैं जब दिन का होरा मिनट तक गोल करने पर 60 मिनट बनता है: 7 दिन मार्च में और 7 दिन सितंबर में।

एक आसान बात याद रखिए। दिन का एक होरा और उसके बाद वाली रात का एक होरा जोड़ें, तो लगभग ठीक 2 घंटे बनते हैं, क्योंकि दिन और रात मिलकर लगभग 24 घंटे होते हैं। दिल्ली में 2026 के हर दिन के लिए की गई गणना में यह जोड़ 2 घंटे से 6 सेकंड के भीतर है। यानी दिन का होरा 60 मिनट से जितना लंबा होता है, रात का होरा लगभग उतना ही छोटा होता है।

हर शहर में होरा का समय अलग क्यों होता है

होरा सूर्योदय और सूर्यास्त से बनता है, और ये दोनों हर शहर में अलग समय पर होते हैं। इसलिए एक ही घड़ी (IST) वाले दो शहरों में भी होरा के समय आमतौर पर एक जैसे नहीं होते। 2026 के पूरे साल में एक भी दिन ऐसा नहीं है जब दिल्ली और मुंबई के सभी 24 होरा एक ही मिनट पर शुरू होते हों।

होरा की लंबाई भी जगह पर निर्भर है। शहर भूमध्य रेखा से जितना दूर होता है, उसके दिन की लंबाई साल भर में उतनी ज़्यादा घटती-बढ़ती है। 2026 के पूरे साल में दिन का एक होरा:

होरा को 60 मिनट का घंटा मान लें तो कितना फ़र्क़ पड़ता है

अगर सूर्योदय से 60-60 मिनट के घंटे गिनकर उन्हें होरा मान लिया जाए, तो पहला होरा सूर्योदय पर ही शुरू होगा, पर उसके खत्म होने के समय से ही फ़र्क़ शुरू हो जाएगा और हर होरा के साथ बढ़ता जाएगा। दिन के अंत तक यह फ़र्क़ उतना हो जाता है, जितना दिन 12 घंटे से लंबा या छोटा है।

दिल्ली में 21 जून 2026 को सूर्यास्त, सूर्योदय के 12 घंटे बाद वाले समय से 1 घंटे 58 मिनट बाद है। 22 दिसंबर 2026 को सूर्यास्त उस समय से 1 घंटे 41 मिनट पहले है। लंदन में 2026 में यही फ़र्क़ जून में 4 घंटे 38 मिनट और दिसंबर में 4 घंटे 10 मिनट तक जाता है।

ग्रह के नाम पर इसका असर जल्दी दिखता है। दिल्ली में 21 जून 2026 को सूर्योदय के एक घंटे बाद से ही दोनों गिनतियाँ अलग ग्रह बताने लगतीं, और दिन के लगभग तीन-चौथाई समय में ग्रह अलग रहता। 22 दिसंबर 2026 को भी दिन के लगभग 70 प्रतिशत समय में ग्रह अलग आता।

अपने शहर का होरा खुद कैसे निकालें

हर शहर के पंचांग पन्ने पर सूर्योदय, सूर्यास्त, दिनमान और रात्रिमान छपे होते हैं, जैसे कोलकाता या टोरंटो के पन्ने पर। इनसे होरा ऐसे निकालिए:

  1. दिनमान को मिनटों में बदलिए और 12 से भाग दीजिए। यह दिन के एक होरा की लंबाई है।
  2. सूर्योदय के समय में यह लंबाई बार-बार जोड़ते जाइए। हर जोड़ पर एक होरा खत्म होता है और अगला शुरू होता है।
  3. पहला होरा वार-स्वामी का लिखिए। फिर ऊपर की पहली तालिका के क्रम से अगले ग्रह लिखते जाइए।
  4. रात के लिए सूर्यास्त से शुरू कीजिए और रात्रिमान को 12 से भाग दीजिए। ग्रहों का क्रम दिन के बारहवें होरा के बाद वहीं से आगे चलता है।

एक उदाहरण लीजिए, जिसमें संख्याएँ सिर्फ़ समझाने के लिए मानी गई हैं। मान लीजिए दिनमान 12 घंटे 24 मिनट है, यानी 744 मिनट। 744 को 12 से भाग देने पर 62 मिनट आता है। अगर सूर्योदय 6:10 AM पर है, तो पहला होरा 6:10 से 7:12 AM तक चलेगा, दूसरा 7:12 से 8:14 AM तक, और इसी तरह आगे।

पन्ने पर छपे समय मिनट तक गोल किए हुए होते हैं। इसलिए इस तरीके से निकाला गया समय, engine से गिने गए समय से कभी-कभी एक मिनट अलग आ सकता है। दिल्ली के 2026 के सभी होरों पर यह तुलना करने पर लगभग हर चार में से एक होरा की शुरुआत एक मिनट अलग निकलती है, और कोई भी होरा एक मिनट से ज़्यादा अलग नहीं निकलता।

जिन शहरों में daylight saving है, वहाँ जिस रात घड़ी एक घंटा आगे या पीछे होती है, उस रात सूर्यास्त के समय में होरा की लंबाई जोड़ते जाने से, घड़ी बदलने के बाद वाले होरों के समय एक घंटा गलत निकलेंगे। engine ऐसी रात में भी असल में बीते समय से गिनता है, घड़ी पर लिखे समय से नहीं।

इसके बाद क्या पढ़ें

ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त भी दिन और रात के बराबर भागों से बनते हैं, पर वहाँ भाग 15 होते हैं। कोई शब्द समझ न आए तो शब्दावली देखिए। कहीं गलती दिखे तो बताइए।

इस पन्ने की सारी तालिकाएँ 24 अक्टूबर 2026 को engine से बनीं, हाथ से नहीं लिखी गईं। वही engine हर शहर के पन्ने के समय निकालता है। गणना का तरीका · यह पन्ना कैसे लिखा गया

अपने शहर का पंचांग

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊकानपुरनागपुरइंदौरभोपालपटनासूरतसभी 60 शहर →

और जानकारी

पंचांगतिथिनक्षत्रराहु कालचौघड़ियाअभिजित मुहूर्तब्रह्म मुहूर्तशब्दावली