सुधार
जो छपा हुआ समय कभी बदलेगा, वह यहाँ दर्ज होगा
कोई भी छपा हुआ मान अगर बदलना पड़ा, तो वह यहाँ तारीख, कारण और असर के साथ लिखा जाएगा — चाहे गलती मैंने खुद पकड़ी हो या किसी पढ़ने वाले ने बताई हो। कुछ भी चुपचाप नहीं हटेगा।
8 अक्टूबर 2026
चंद्रोदय और चंद्रास्त की परिभाषा बदली
पहले: चंद्रोदय और चंद्रास्त चाँद के केंद्र से गिने जाते थे, क्षितिज पर ठीक शून्य डिग्री पर, बिना अपवर्तन के। गणना के तरीके वाले पन्ने पर यह भी लिखा था कि यह परिभाषा अभी पक्की नहीं है।
अब: चाँद का ऊपरी किनारा, सामान्य अपवर्तन (34 कला) और लंबन के साथ। सूर्योदय के लिए यही परिभाषा पहले से ली जाती है, और खगोलीय पंचांग-पुस्तकें चाँद के लिए भी यही लेती हैं। करवा चौथ जैसे व्रतों में लोग वह समय ढूँढते हैं जब चाँद सबसे पहले दिख सकता है, और वह ऊपरी किनारे वाला समय है।
असर, नापा हुआ: 8 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक, 40 शहरों के 2,480 चंद्रोदय और चंद्रास्त में से 2,405 का छपा मिनट बदला। चंद्रोदय 3.5 से 8.3 मिनट पहले आया (औसत 4.2 मिनट), और चंद्रास्त उतना ही बाद में। सबसे बड़ा बदलाव लंदन जैसे ऊँचे अक्षांश वाले शहरों में है। 10 शहर-दिनों में चंद्रोदय या चंद्रास्त इतना खिसका कि वह सूर्योदय से अगले सूर्योदय वाले पंचांग दिन के अंदर आ गया या बाहर चला गया।
कई बड़े पंचांग अब भी केंद्र वाली परिभाषा छापते हैं, इसलिए उनमें चंद्रोदय यहाँ से कुछ मिनट बाद का दिखेगा। दोनों परिभाषाओं की शहर-वार तुलना गणना कितनी सही है पर है।
5 अक्टूबर 2026
शहर सुझाने वाला संदेश गलत शहर बताता था
क्या गलत था: पन्ना आपके device के समय क्षेत्र से अंदाज़ा लगाकर पूछता था कि "आप फ़लाँ शहर में हैं?"। पर वह उस समय क्षेत्र का पहला शहर उठा लेता था, और सूची में पहला शहर दिल्ली है। भारत के 30 शहर एक ही समय क्षेत्र में हैं, इसलिए मुंबई, जयपुर या पटना के पाठक को, उसी शहर के सही पन्ने पर, लिखा आता था कि "आप दिल्ली में हैं?"। ह्यूस्टन और डलास के पाठकों को शिकागो, और एडिसन के पाठकों को न्यूयॉर्क दिखता था।
अब: यह संदेश तभी आता है जब उस समय क्षेत्र में साइट का सिर्फ़ एक ही शहर हो। जहाँ समय क्षेत्र से शहर पक्का नहीं होता, वहाँ कुछ नहीं पूछा जाता। कोई छपा हुआ समय इससे नहीं बदला।
तिथि और करण की दूसरी पंक्ति पर तारीख नहीं छपती थी
क्या गलत था: जब एक ही पंचांग दिन में दो तिथियाँ या दो करण आते हैं, तो दूसरी पंक्ति ↳ के साथ छपती है। उस पंक्ति पर तारीख तभी लिखी जाती थी जब वह पहली पंक्ति की तारीख से अलग हो। अगर दोनों अगले दिन खत्म होते, तो दूसरी पंक्ति पर सिर्फ़ समय रह जाता और यह साफ़ नहीं होता कि वह किस दिन का है।
अब: तारीख तब लिखी जाती है जब वह समय पन्ने की अपनी तारीख से अलग दिन पर पड़े।
यह पन्ना खुद, दूसरी बार
16 सितंबर वाले हिस्से में लिखा था कि "0.05 सेकंड" वाला दावा अब कहीं नहीं बचा। वह पूरी तरह सही नहीं था: गणना के तरीके वाले पन्ने पर एक तीसरा वाक्य, जिसमें सितंबर के दस दिनों का नाप 0.05 सेकंड लिखा था, 5 अक्टूबर तक रहा। अब उसकी जगह गणना कितनी सही है का link है, ताकि संख्या एक ही जगह रहे और पुरानी न पड़े।
16 सितंबर 2026
ब्रह्म मुहूर्त और प्रातः सन्ध्या गलत रात से गिने जा रहे थे
क्या गलत था: ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले वाली रात का, आखिरी से दूसरा मुहूर्त है। यानी उसकी लंबाई उस रात से आती है जो इसी सूर्योदय पर खत्म होती है। engine उसकी जगह सूर्यास्त के बाद वाली रात की लंबाई ले रहा था। प्रातः सन्ध्या में भी यही गलती थी। नियम की file में सही नियम लिखा था, पर code उससे अलग चल रहा था।
असर: लगातार दो रातों की लंबाई में रोज़ कुछ सेकंड का फ़र्क़ होता है, इसलिए ये समय कुछ सेकंड खिसके रहते थे। कई दिन यह फ़र्क़ छपे हुए मिनट को भी बदल देता था। दिल्ली में साल के लगभग 13% दिन, और London में लगभग 33% दिन।
आधे मिनट पर गोल करने में चूक
क्या गलत था: जिस समय में 29.5 से 30 सेकंड थे, वह अगले मिनट पर गोल हो रहा था। जैसे 6:00:29.6 छपता था 6:01, जबकि सबसे नज़दीकी मिनट 6:00 है। वजह यह थी कि पहले सेकंड गोल होते थे और फिर मिनट।
असर: ऐसे समय एक मिनट बाद छपते थे। यह किसी भी पंक्ति में हो सकता था: चौघड़िया, राहु काल, चंद्रोदय, अमृत काल।
दोनों का मिलाकर असर, नापा हुआ: 16 सितंबर के 120 शहर-पन्नों पर छपे 8,991 समयों में से 145 बदले, 50 पन्नों पर। हर बदलाव ठीक एक मिनट का था।
घड़ी बदलने वाली रात — छपने से पहले पकड़ी गई
जिन शहरों में daylight saving है (London, New York, Toronto, Chicago, Houston, Dallas, Edison, Fremont, Sydney), वहाँ जिस रात घड़ी एक घंटा आगे या पीछे होती है, उस रात की लंबाई engine एक घंटा गलत नाप रहा था। वह घड़ी पर लिखे समय से हिसाब लगा रहा था, असल में बीते समय से नहीं।
इससे उस रात के चौघड़िया, निशीथ मुहूर्त और रात के दुर्मुहूर्त आधे घंटे से ज़्यादा खिसक जाते। 24 अक्टूबर 2026 के London पन्ने पर 32 मिनट तक का फ़र्क़ नापा गया।
मास का नाम गलत छप रहा था
क्या गलत था: अमांत मास का नाम उस अमावस्या से तय होता है जिससे महीना शुरू हुआ। engine उसकी जगह उसी दिन के सूर्योदय पर सूर्य की राशि से नाम रख रहा था। इसलिए हर अमावस्या से अगली संक्रांति तक पिछले महीने का नाम छपता था। अधिक मास भी पहचाना नहीं जाता था, और विक्रम और शक संवत् का साल चैत्र की जगह 1 अप्रैल को बदलता था।
असर, नापा हुआ: 11 सितंबर 2026 की अमावस्या से भाद्रपद शुरू हो गया था, पर 11 से 16 सितंबर तक पंचांग के पन्नों पर श्रावण छपा। 40 शहरों में कुल 208 शहर-दिन।
चंद्रोदय छूट रहा था
क्या गलत था: engine आधी रात के बाद का पहला चंद्रोदय लेता था। अगर वह सूर्योदय से पहले पड़ता, तो उसे उस दिन का न मानकर छोड़ देता और — छाप देता, जबकि चंद्रमा अगले सूर्योदय से पहले फिर उगता था।
असर, नापा हुआ: 5 से 16 सितंबर के 480 शहर-दिनों में से 174 पर चंद्रोदय की जगह — छपा। जैसे मुंबई, 5 सितंबर: चंद्रोदय रात 1:16 बजे था। चंद्रास्त पर असर नहीं था।
वर्ज्य और अमृत काल
क्या गलत था: सिर्फ़ सूर्योदय के समय वाले नक्षत्र के वर्ज्य और अमृत काल छपते थे, बिना तारीख के, चाहे वे सूर्योदय से पहले ही खत्म हो चुके हों। और जो नक्षत्र दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर खत्म हो जाता, उसके वर्ज्य और अमृत काल कहीं नहीं छपते थे।
असर, नापा हुआ: 5 से 16 सितंबर में 353 ऐसे समय छपे जो उस दिन के बाहर थे, और 464 ऐसे छूटे जो दिन के अंदर थे। अब सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बीच पड़ने वाले सारे वर्ज्य और अमृत काल छपते हैं।
यह पन्ना खुद
नीचे 5 सितंबर वाले हिस्से में लिखा है कि "0.05 सेकंड के भीतर" वाला दावा गणना के तरीके वाले पन्ने से हटाया गया। वह एक जगह से हटा था, पर उसी पन्ने पर एक और जगह 16 सितंबर तक रह गया, जो उस दिन हटाई गई।
कोई गलत समय छपा नहीं। site शुरू होने के बाद से किसी शहर में घड़ी नहीं बदली थी। पहली ऐसी रात 3–4 अक्टूबर 2026 को Sydney में आती।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण के अंत का समय — छपने से पहले पकड़ा गया
engine पहले घंटे-घंटे पर देखता है कि कोई तिथि या नक्षत्र बदला या नहीं, फिर उस घंटे के अंदर ठीक समय खोजता है। यह खोज कुछ मामलों में सही जवाब तक पहुँचकर भी आगे चलती रहती थी, और आखिर में उससे कम सही बिंदु लौटा देती थी। ऐसा तब होता था जब बदलाव घंटे की शुरुआत या अंत के बहुत पास पड़ता।
असर, नापा हुआ: 2026 और 2027 के 3,763 अंत-समयों में से ज़्यादातर मिलीसेकंड के भीतर सही थे, पर कुछ नहीं। सबसे बड़ी गलती 15 अगस्त 2027 को श्रवण नक्षत्र के शुरू होने में 6.4 सेकंड की थी। 2026 में सबसे बड़ी 19 सितंबर 2026 के योग में 3.2 सेकंड की थी।
कोई छपा हुआ मिनट नहीं बदला। 5 से 19 सितंबर 2026 के बीच का कोई भी समय गोल होने पर वही मिनट देता है। जिन छह समयों का मिनट बदलता, वे सब 2027 के हैं। अब हर अंत-समय Swiss Ephemeris से 0.01 सेकंड के भीतर है, और जाँच नमूने पर नहीं, हर एक समय पर चलती है।
5 सितंबर 2026
समय गोल होने की जगह काटे जा रहे थे
क्या गलत था: सेकंड हटा दिए जाते थे। दिल्ली का सूर्योदय 6:00:59.8 पर था और छपा 6:00 AM, जबकि सही 6:01 AM है।
असर: सभी 40 शहरों पर हर समय 59 सेकंड तक पहले छपता था।
मास का नाम
क्या गलत था: मास का नाम देवनागरी तालिका के बीच लैटिन अक्षरों में छपता था ('Shravana'), और यह नहीं लिखा था कि कौन सी परंपरा ली गई है।
अब: श्रावण, और साथ में लिखा है कि मास अमांत है।
गणना के तरीके वाले पन्ने पर तीन गलत दावे
- ephemeris की अवधि 1549 से 2650 लिखी थी। यह किसी दूसरी file की है। जो file इस्तेमाल होती है, उसकी अवधि 1849 से 2150 है। engine में भी यही गलत सीमा हाथ से लिखी थी। अब engine उसे file से ही पढ़ता है।
- ayanamsa की जाँच 11,239 समय-बिंदुओं पर बताई गई थी। जो परीक्षण रखा गया है, वह 1,507 बिंदुओं पर चलता है।
- "0.05 सेकंड के भीतर" को गारंटी की तरह लिखा था। जाँच की शर्त 2 सेकंड है, और 0.05 एक बार का नाप था।
कुछ गलत लगे तो बताइए।