पंचांगNow

नक्षत्र क्या है

चंद्रमा आकाश के 27 बराबर हिस्सों में से जिस हिस्से में हो, वही नक्षत्र

Nakshatra · Nakshatram · Nakshtra · Varjyam · Amrit Kalam

नक्षत्र बताता है कि चंद्रमा इस समय आकाश के किस हिस्से में है। आकाश में सूर्य का सालाना रास्ता, जिसे ecliptic कहते हैं, 360 अंश का एक पूरा घेरा है। इस घेरे को 27 बराबर हिस्सों में बाँटा गया है, और हर हिस्से का एक नाम है: अश्विनी से रेवती तक। चंद्रमा की स्थिति इस घेरे पर जिस हिस्से में पड़ती है, वही उस समय का नक्षत्र है।

नक्षत्र पंचांग के पाँच अंगों में से एक है। बाकी चार हैं तिथि, वार, योग और करण। पाँचों एक साथ पंचांग क्या है में समझाए गए हैं।

आज कौन सा नक्षत्र है, और कब तक रहेगा

नीचे की तालिका की पहली पंक्ति में वह नक्षत्र है जो तालिका बनते समय चल रहा था। उसके बाद आने वाले नक्षत्र क्रम से हैं। सारे समय भारतीय समय (IST) में हैं। किसी पंक्ति का "समाप्त" ही अगली पंक्ति का "शुरू" है।

नक्षत्र बदलने का पल पूरी पृथ्वी पर एक ही होता है। भारत से बाहर हों तो सिर्फ़ घड़ी का समय अपने time zone में बदलना है, या सीधे अपने शहर का पन्ना खोलिए, जैसे न्यूयॉर्क या लंदन। अपने शहर में "आज" का नक्षत्र कौन सा गिना जाएगा, यह सूर्योदय से तय होता है, जो आगे समझाया है।

अभी चल रहे और आने वाले नक्षत्र · भारतीय समय (IST)
नक्षत्रशुरूसमाप्त
उत्तरा भाद्रपद9:03 PM, 23 अक्टूबर8:32 PM, 24 अक्टूबर
रेवती8:32 PM, 24 अक्टूबर7:22 PM, 25 अक्टूबर
अश्विनी7:22 PM, 25 अक्टूबर5:41 PM, 26 अक्टूबर
भरणी5:41 PM, 26 अक्टूबर3:39 PM, 27 अक्टूबर
कृत्तिका3:39 PM, 27 अक्टूबर1:26 PM, 28 अक्टूबर
रोहिणी1:26 PM, 28 अक्टूबर11:12 AM, 29 अक्टूबर
मृगशिरा11:12 AM, 29 अक्टूबर9:05 AM, 30 अक्टूबर
आर्द्रा9:05 AM, 30 अक्टूबर7:12 AM, 31 अक्टूबर
पुनर्वसु7:12 AM, 31 अक्टूबर5:40 AM, 1 नवंबर
पुष्य5:40 AM, 1 नवंबर4:31 AM, 2 नवंबर

इन पंक्तियों में शुरू और समाप्त के बीच का समय देखिए। सारे नक्षत्र बराबर लंबे नहीं होते। इसकी वजह नीचे है।

27 नक्षत्र कौन से हैं, और हर एक कितना बड़ा है

360 अंश को 27 से बाँटें तो हर हिस्सा 13 अंश 20 कला, यानी 13°20′ का आता है। पहला नक्षत्र अश्विनी 0° से शुरू होता है। आखिरी नक्षत्र रेवती 360° पर खत्म होता है, और वहीं से अश्विनी फिर शुरू होता है। चंद्रमा यह पूरा घेरा लगभग 27 दिन में घूम लेता है, इसलिए एक नक्षत्र औसतन लगभग एक दिन चलता है।

नीचे की तालिका में 27 नक्षत्र क्रम से हैं। तीसरे स्तंभ में चंद्रमा की sidereal स्थिति की वह सीमा है जिसमें वह नक्षत्र रहता है। किसी पल चंद्रमा की स्थिति जिस सीमा में हो, उसी पंक्ति का नाम उस पल का नक्षत्र है।

चंद्रमा की sidereal स्थिति — हर 13°20′ पर एक नक्षत्र
क्रमनक्षत्रचंद्रमा की स्थिति
1अश्विनी0°00′ – 13°20′
2भरणी13°20′ – 26°40′
3कृत्तिका26°40′ – 40°00′
4रोहिणी40°00′ – 53°20′
5मृगशिरा53°20′ – 66°40′
6आर्द्रा66°40′ – 80°00′
7पुनर्वसु80°00′ – 93°20′
8पुष्य93°20′ – 106°40′
9आश्लेषा106°40′ – 120°00′
10मघा120°00′ – 133°20′
11पूर्वा फाल्गुनी133°20′ – 146°40′
12उत्तरा फाल्गुनी146°40′ – 160°00′
13हस्त160°00′ – 173°20′
14चित्रा173°20′ – 186°40′
15स्वाति186°40′ – 200°00′
16विशाखा200°00′ – 213°20′
17अनुराधा213°20′ – 226°40′
18ज्येष्ठा226°40′ – 240°00′
19मूल240°00′ – 253°20′
20पूर्वाषाढ़ा253°20′ – 266°40′
21उत्तराषाढ़ा266°40′ – 280°00′
22श्रवण280°00′ – 293°20′
23धनिष्ठा293°20′ – 306°40′
24शतभिषा306°40′ – 320°00′
25पूर्वा भाद्रपद320°00′ – 333°20′
26उत्तरा भाद्रपद333°20′ – 346°40′
27रेवती346°40′ – 360°00′

शहर के पन्ने पर छपी चंद्र राशि भी चंद्रमा की इसी स्थिति से निकलती है। हर राशि 30° की है, यानी सवा दो नक्षत्र के बराबर। जैसे मेष राशि 0° से 30° तक है। उसमें अश्विनी, भरणी और कृत्तिका का पहला चौथाई हिस्सा आता है।

कुछ पद्धतियों में अभिजित को 28वाँ नक्षत्र भी गिना जाता है। यहाँ के सारे समय 27 बराबर नक्षत्रों से निकलते हैं, इसलिए ऊपर की तालिका में अभिजित नहीं है। अभिजित मुहूर्त एक अलग चीज़ है। वह दिन के 15 मुहूर्तों में से आठवाँ मुहूर्त है, चंद्रमा की कोई स्थिति नहीं। बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं होता।

नक्षत्र गिनने में ayanamsa क्यों मायने रखता है

आकाश के घेरे पर गिनती कहाँ से शुरू हो, इसके दो तरीके हैं। एक तरीका उस बिंदु से गिनता है जहाँ वसंत विषुव (vernal equinox) पर सूर्य होता है। इसे tropical गिनती कहते हैं। दूसरा तरीका तारों के सापेक्ष गिनता है। इसे sidereal गिनती कहते हैं, और पंचांग के नक्षत्र इसी से बनते हैं।

पृथ्वी की धुरी की दिशा बहुत धीरे-धीरे बदलती रहती है। इसलिए विषुव वाला बिंदु तारों के सामने थोड़ा-थोड़ा पीछे खिसकता रहता है। दोनों गिनतियों के बीच के इसी अंतर को ayanamsa कहते हैं। 2026 में Lahiri ayanamsa लगभग 24.2° है, और यह हर साल लगभग 50 arcsecond बढ़ता है। चंद्रमा की sidereal स्थिति पाने के लिए उसकी tropical स्थिति में से ayanamsa घटाया जाता है।

Ayanamsa निकालने के कई तरीके हैं, और वे अलग-अलग मान देते हैं। यह site Lahiri (Chitrapaksha) ayanamsa लेती है, जिसे भारत की Calendar Reform Committee ने तय किया था और जो राष्ट्रीय पंचांग में इस्तेमाल होता है। इसकी पूरी परिभाषा गणना का तरीका में लिखी है।

तिथि पर असर नहीं, नक्षत्र पर सीधा असर

तिथि इस बात से बनती है कि चंद्रमा सूर्य से कितना आगे है। सूर्य और चंद्रमा, दोनों की स्थिति में से एक ही ayanamsa घटता है, इसलिए दोनों के अंतर में वह कट जाता है। नक्षत्र सिर्फ़ चंद्रमा की स्थिति से बनता है। इसलिए ayanamsa जितना बदले, हर नक्षत्र की सीमा उतनी ही खिसक जाती है।

2026 के नक्षत्रों पर गिनें तो ayanamsa में 1 arcminute का फ़र्क़ नक्षत्र बदलने के समय को लगभग डेढ़ से दो मिनट खिसका देता है। Krishnamurti (KP) ayanamsa 2026 में Lahiri से लगभग 5.8 arcminute कम है। उससे गिनने पर हर नक्षत्र लगभग 9 से 12 मिनट पहले बदलता। Raman ayanamsa लगभग 1°27′ कम है। उससे गिनने पर यही बदलाव लगभग सवा दो से तीन घंटे पहले आता।

इसलिए दो पंचांगों में नक्षत्र का समय अलग दिखे, तो सबसे पहले यह देखिए कि दोनों ने कौन सा ayanamsa लिया है। बड़े पंचांगों से यहाँ के नक्षत्र के अंत का समय आमतौर पर मिनट तक मिलता है। इस पर और बात समय अलग क्यों आता है में है।

एक नक्षत्र कितने घंटे का होता है

आकाश में हर नक्षत्र बराबर 13°20′ का है, पर घड़ी में उसकी लंबाई हर बार अलग निकलती है। वजह चंद्रमा की चाल है। चंद्रमा पृथ्वी के पास होता है तो तेज़ चलता है, और नक्षत्र जल्दी पार कर लेता है। दूर होता है तो धीमा चलता है, और नक्षत्र ज़्यादा देर चलता है।

2026 में, भारतीय समय के हिसाब से, सबसे छोटा नक्षत्र 24–25 दिसंबर का आर्द्रा है: 20 घंटे 54 मिनट। सबसे लंबा 12–13 दिसंबर का उत्तराषाढ़ा है: 27 घंटे 8 मिनट। पूरे साल का औसत लगभग 24 घंटे 15 मिनट है। इसीलिए नक्षत्र रोज़ एक ही घड़ी-समय पर नहीं बदलता।

किसी दिन का नक्षत्र कैसे तय होता है

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। इसलिए किसी दिन का नक्षत्र वह है जो उस शहर के सूर्योदय के समय चल रहा था। शहर के पन्ने की "पाँच अंग" तालिका में नक्षत्र के सामने "कब तक" में उसके खत्म होने का समय लिखा होता है। अगर वह अगले सूर्योदय से पहले खत्म हो जाए, तो उसके नीचे ↳ वाली पंक्ति में अगला नक्षत्र और उसका अंत भी दिखता है।

नक्षत्र लगभग एक दिन का होता है, पर ठीक एक दिन का नहीं। इसलिए दो बातें होती रहती हैं। कभी एक ही नक्षत्र लगातार दो सूर्योदयों पर चल रहा होता है, और दो दिन उसी का नाम आता है। कभी कोई नक्षत्र एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जाता है। उस शहर में वह किसी दिन का नक्षत्र नहीं बनता, और पन्ने पर ↳ वाली पंक्ति में दिखता है। दिल्ली के सूर्योदय से 2026 के दिन गिनें तो पहली बात 14 बार होती है और दूसरी 10 बार।

नक्षत्र हर शहर में अलग क्यों हो सकता है

नक्षत्र बदलने का पल सब जगह एक है, पर सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है। मान लीजिए नक्षत्र उस समय बदला जब एक शहर में सूर्योदय हो चुका था और दूसरे में अभी नहीं हुआ था। तो उस दिन पहले शहर में पुराना नक्षत्र गिना जाएगा और दूसरे में नया।

2026 में ऐसे 14 दिन हैं जब गुवाहाटी और अहमदाबाद में दिन का नक्षत्र अलग है। इन दोनों शहरों के सूर्योदय में साल भर 70 से 84 मिनट का अंतर रहता है। दिल्ली और अहमदाबाद के बीच ऐसे सिर्फ़ 3 दिन हैं, क्योंकि उनके सूर्योदय में 6 से 31 मिनट का ही अंतर रहता है।

वर्ज्य और अमृत काल नक्षत्र से कैसे गिने जाते हैं

शहर के पन्ने पर "अशुभ काल" की सूची में वर्ज्य छपता है, और "शुभ मुहूर्त" की सूची में अमृत काल। परंपरा में वर्ज्य को शुभ काम शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, और अमृत काल को शुभ माना जाता है। राहु काल या चौघड़िया सूर्योदय से गिने जाते हैं। वर्ज्य और अमृत काल सूर्योदय से नहीं, नक्षत्र के शुरू होने के पल से गिने जाते हैं।

यहाँ घटिका का मतलब क्या है

आम तौर पर घटिका दिन-रात का 60वाँ हिस्सा, यानी 24 मिनट, मानी जाती है। वर्ज्य और अमृत काल में घटिका का मतलब अलग है। यहाँ एक घटिका उसी नक्षत्र की अपनी लंबाई का 60वाँ हिस्सा है।

याद रखने का आसान तरीका: नक्षत्र जितने घंटे का, एक घटिका उतने मिनट की। 25 घंटे के नक्षत्र में एक घटिका 25 मिनट की होगी। 2026 के नक्षत्रों में एक घटिका लगभग 21 से 27 मिनट की रहती है।

कितनी देर का होता है, और कब शुरू होता है

वर्ज्य और अमृत काल, दोनों 4 घटिका लंबे होते हैं, यानी नक्षत्र की लंबाई का 15वाँ हिस्सा। 2026 के सबसे छोटे नक्षत्र में यह लगभग 1 घंटे 24 मिनट बनता है, और सबसे लंबे में लगभग 1 घंटे 49 मिनट।

ये कब शुरू होंगे, यह हर नक्षत्र के लिए एक तय संख्या से निकलता है: नक्षत्र शुरू होने के बाद इतनी घटिका बीतने पर। जैसे अश्विनी में वर्ज्य 50 घटिका बीतने पर शुरू होता है और अमृत काल 42 घटिका पर। इस तालिका में मूल अकेला नक्षत्र है जिसमें वर्ज्य दो बार आता है, 20 और 56 घटिका पर। दूसरा वर्ज्य ठीक नक्षत्र के अंत पर खत्म होता है, क्योंकि 56 और 4 मिलकर 60 होते हैं।

एक असली उदाहरण

engine की गणना में शतभिषा नक्षत्र 17 फ़रवरी 2026 को 9:16 PM (IST) पर शुरू हुआ और 18 फ़रवरी को 9:16 PM पर खत्म हुआ। यानी यह लगभग ठीक 24 घंटे का था, और इसकी एक घटिका 24 मिनट की थी।

उस दिन दिल्ली में सूर्योदय 6:57 AM पर हुआ था। यानी उस दिन का वर्ज्य सूर्योदय से पहले ही पूरा हो चुका था, और अमृत काल दोपहर में पड़ा।

ये सूर्योदय से पहले भी क्यों पड़ जाते हैं

वर्ज्य और अमृत काल नक्षत्र के अंदर अपनी तय जगह पर पड़ते हैं, सूर्योदय से बंधे नहीं होते। सूर्योदय पर जो नक्षत्र चल रहा होता है, वह सूर्योदय से पहले ही शुरू हो चुका होता है, कई बार पिछले दिन दोपहर या शाम को। इसलिए उसका वर्ज्य या अमृत काल दिन या रात के किसी भी पहर में पड़ सकता है, सूर्योदय से पहले भी। दिल्ली के सूर्योदय से 2026 के सभी 365 दिन गिनें, तो 207 दिन सूर्योदय वाले नक्षत्र का वर्ज्य उस दिन के सूर्योदय से पहले ही पूरा हो चुका था। अमृत काल के लिए ऐसे 76 दिन हैं।

क्योंकि ये नक्षत्र के शुरू और अंत से गिने जाते हैं, इसलिए किसी नक्षत्र का वर्ज्य और अमृत काल पूरी पृथ्वी पर एक ही पल में पड़ता है। भारत के सभी शहरों में उनका घड़ी-समय एक ही होता है, जबकि राहु काल हर शहर में अलग होता है। ऊपर की IST तालिका से किसी नक्षत्र का शुरू और समाप्त लेकर आप नीचे की संख्याओं से उसका वर्ज्य और अमृत काल खुद गिन सकते हैं। तालिका के समय मिनट तक गोल हैं, इसलिए आपका जवाब एक-आध मिनट अलग आ सकता है।

हर नक्षत्र में वर्ज्य और अमृत काल कितनी घटिका पर

नीचे हर नक्षत्र के लिए वह संख्या है, जितनी घटिका बीतने पर वर्ज्य और अमृत काल शुरू होते हैं। दोनों की लंबाई हर नक्षत्र में 4 घटिका है। ये संख्याएँ परंपरा की तालिका से हैं। engine में इनका जो रूप चलता है, वह प्रचलित पंचांगों के छपे समय से मिलाकर पक्का किया गया है; पूरी बात गणना का तरीका में है।

इस पन्ने की सारी तालिकाएँ 24 अक्टूबर 2026 को engine से बनीं, हाथ से नहीं लिखी गईं। वही engine हर शहर के पन्ने के समय निकालता है। गणना का तरीका · यह पन्ना कैसे लिखा गया

अपने शहर का पंचांग

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊकानपुरनागपुरइंदौरभोपालपटनासूरतसभी 60 शहर →

और जानकारी

पंचांगतिथिराहु कालचौघड़ियाअभिजित मुहूर्तब्रह्म मुहूर्तहोराशब्दावली