अभिजित मुहूर्त क्या है
दिन के 15 मुहूर्तों में से ठीक बीच वाला, और उसका समय रोज़ क्यों बदलता है
Abhijit Muhurat · Abhijit Muhurta · Abhijeet Muhurat
अभिजित मुहूर्त दिन के बीचोंबीच पड़ने वाला एक मुहूर्त है। पंचांग सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 15 बराबर भागों में बाँटता है, और हर भाग एक मुहूर्त कहलाता है। इन 15 में से आठवाँ भाग अभिजित है। उससे पहले सात मुहूर्त होते हैं और उसके बाद भी सात। परंपरा में इसे दिन का शुभ समय माना जाता है।
यहाँ "मुहूर्त" का मतलब समय की एक इकाई है, किसी काम के लिए चुनी गई तारीख नहीं। घड़ी के घंटे की तरह इसकी लंबाई तय नहीं होती। वह उस दिन की लंबाई से निकलती है।
अभिजित मुहूर्त कैसे गिना जाता है
पूरा हिसाब चार कदम का है, और इसमें सिर्फ़ शहर का अपना सूर्योदय और सूर्यास्त लगता है।
- उस दिन का सूर्योदय और सूर्यास्त लीजिए।
- दोनों के बीच का समय दिनमान है। शहर के पंचांग पन्ने पर दिनमान भी छपा रहता है।
- दिनमान को 15 से भाग दीजिए। यह एक मुहूर्त की लंबाई है।
- सूर्योदय में 7 मुहूर्त जोड़िए, वहाँ अभिजित शुरू होता है। 8 मुहूर्त जोड़िए, वहाँ खत्म होता है।
एक सीधा उदाहरण, सिर्फ़ हिसाब समझने के लिए: अगर किसी दिन दिनमान ठीक 12 घंटे का हो, तो एक मुहूर्त 48 मिनट का होगा। तब अभिजित सूर्योदय के 5 घंटे 36 मिनट बाद शुरू होगा और 6 घंटे 24 मिनट बाद खत्म होगा। असली दिनों में दिनमान इससे कम या ज़्यादा होता है, इसलिए असली समय हर दिन अलग निकलता है।
अभिजित का समय सिर्फ़ सूर्योदय और सूर्यास्त से बनता है। वार बस यह तय करता है कि उस दिन अभिजित छपेगा या नहीं। उस दिन की तिथि या नक्षत्र से इसका समय नहीं बदलता। सूर्योदय किस परिभाषा से गिना जाता है, यह गणना के तरीके में लिखा है। जिस पंचांग में सूर्योदय किसी दूसरी परिभाषा से गिना गया हो, वहाँ अभिजित का समय भी थोड़ा अलग आ सकता है।
अभिजित दिन के ठीक बीच में क्यों पड़ता है
आठवाँ मुहूर्त सूर्योदय के 7 मुहूर्त बाद शुरू होता है और 8 मुहूर्त बाद खत्म। उसका बीच 7½ मुहूर्त पर है, और 15 का आधा भी 7½ ही है। इसलिए अभिजित का बीच हर दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच वाले क्षण पर पड़ता है। गणना में इसी क्षण को दिन का मध्य, यानी मध्याह्न, लिया जाता है।
यह वह क्षण नहीं है जब सूर्य स्थानीय meridian पार करता है और लगभग अपनी सबसे ऊँची जगह पर होता है (solar transit)। दोनों बहुत पास होते हैं, पर एक नहीं। 2026 के हर दिन की गणना में दिल्ली में इन दोनों का अंतर 14 सेकंड से कम है, और लंदन में 34 सेकंड से कम। अभिजित का नियम सूर्योदय और सूर्यास्त से चलता है, इसलिए उसका बीच भी इन्हीं दोनों के बीच का क्षण है।
दिन का मध्य ज़रूरी नहीं कि घड़ी के 12 बजे आए। 2026 में दिल्ली में यह सबसे जल्दी नवंबर की शुरुआत में 12:04 PM पर आता है, और सबसे देर फ़रवरी में 12:35 PM पर। अभिजित भी इसी के साथ आगे-पीछे होता है। 2026 में दिल्ली का अभिजित सबसे जल्दी 11:42 AM पर शुरू होता है (अक्टूबर के आख़िर और नवंबर की शुरुआत में), और सबसे देर 12:58 PM पर खत्म होता है (फ़रवरी में)।
रात में यही तरीका रात के 15 मुहूर्तों पर चलता है। रात के ठीक बीच वाला मुहूर्त शहर-पन्नों पर निशीथ मुहूर्त के नाम से छपता है।
नीचे दिल्ली के अगले सात दिन हैं। "दिन का मध्य" वाले खाने को अभिजित के समय से मिलाइए: मिनट की गोलाई छोड़ दें, तो वह अभिजित का ठीक बीच है। सात दिनों में एक बुधवार ज़रूर आता है, और उस पंक्ति में समय की जगह "नहीं" लिखा मिलेगा।
| तारीख | वार | अभिजित मुहूर्त | दिन का मध्य |
|---|---|---|---|
| 24 अक्टूबर | शनिवार | 11:43 AM – 12:28 PM | 12:05 PM |
| 25 अक्टूबर | रविवार | 11:43 AM – 12:27 PM | 12:05 PM |
| 26 अक्टूबर | सोमवार | 11:42 AM – 12:27 PM | 12:05 PM |
| 27 अक्टूबर | मंगलवार | 11:42 AM – 12:27 PM | 12:05 PM |
| 28 अक्टूबर | बुधवार | नहीं (बुधवार) | 12:05 PM |
| 29 अक्टूबर | गुरुवार | 11:42 AM – 12:27 PM | 12:05 PM |
| 30 अक्टूबर | शुक्रवार | 11:42 AM – 12:27 PM | 12:05 PM |
बुधवार को अभिजित मुहूर्त क्यों नहीं दिखता
प्रचलित परंपरा में बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं माना जाता। शहर-पन्ने इस बारे में प्रचलित पंचांगों का तरीका अपनाते हैं: बुधवार को "शुभ मुहूर्त" की तालिका में अभिजित के आगे "आज नहीं" लिखा आता है। उस दिन के लिए कोई समय गढ़ा नहीं जाता।
पर यह चलन हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ पंचांग बुधवार को भी दिन के आठवें मुहूर्त को अभिजित के नाम से छापते हैं। आपके परिवार या क्षेत्र की परंपरा इससे अलग हो सकती है। परंपराओं के ऐसे अंतरों के बारे में अस्वीकरण भी देखिए।
बुधवार को एक और बात दिखेगी। उस दिन "अशुभ काल" की तालिका में दुर्मुहूर्त ठीक उसी समय का छपता है जहाँ बाकी दिनों अभिजित पड़ता, क्योंकि बुधवार के दुर्मुहूर्त का नियम दिन का आठवाँ मुहूर्त ही है।
अभिजित मुहूर्त कितनी देर का होता है
अभिजित ठीक एक मुहूर्त लंबा होता है, यानी दिनमान का पंद्रहवाँ हिस्सा। दिनमान ठीक 12 घंटे का हो तो यह 48 मिनट बनता है। जिन महीनों में दिन लंबा होता है, उनमें अभिजित भी लंबा होता है, और छोटे दिनों में छोटा। 2026 के हर दिन की गणना से:
- दिल्ली में यह 22 दिसंबर के आसपास सबसे छोटा, 41 मिनट का, और 21 जून के आसपास सबसे लंबा, 56 मिनट का होता है।
- चेन्नई भूमध्य रेखा के ज़्यादा पास है, इसलिए वहाँ फ़र्क़ कम है: 45 से 52 मिनट।
- लंदन में फ़र्क़ बहुत बड़ा है: दिसंबर के आसपास 31 मिनट, और जून के आसपास 1 घंटे 7 मिनट।
- सिडनी पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से में है, इसलिए वहाँ उल्टा होता है: जून के आसपास सबसे छोटा (40 मिनट) और दिसंबर के आसपास सबसे लंबा (58 मिनट)।
शुरू और खत्म होने के समय अलग-अलग, पास के मिनट तक गोल करके छपते हैं। इसलिए घड़ी के दोनों समयों का अंतर कभी-कभी मुहूर्त की असली लंबाई से एक मिनट कम या ज़्यादा दिखता है। यह गलती नहीं, सिर्फ़ गोलाई का असर है।
हर शहर में अभिजित का समय अलग क्यों होता है
क्योंकि हर शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त अलग है। एक ही घड़ी पर चलने वाले शहरों में, जो शहर जितना पूरब में है, वहाँ दिन का मध्य घड़ी में उतना पहले आता है। भारत के सब शहर IST पर चलते हैं, फिर भी 2026 के हर दिन गुवाहाटी में दिन का मध्य मुंबई से लगभग 75 मिनट पहले आता है। और शहर भूमध्य रेखा से जितना दूर हो, उसके दिन की लंबाई, और उसके साथ अभिजित की लंबाई, मौसम के साथ उतनी ज़्यादा बदलती है।
भारत के बाहर के शहरों का समय वहाँ की अपनी घड़ी में छपता है। जिन शहरों में daylight saving है, जैसे लंदन या न्यूयॉर्क, वहाँ जिस दिन घड़ी एक घंटा आगे या पीछे होती है, उस दिन अभिजित का घड़ी वाला समय भी लगभग एक घंटा खिसक जाता है। सूर्य के हिसाब से अभिजित अपनी जगह पर ही रहता है, बदलती सिर्फ़ घड़ी है।
नीचे कुछ शहरों का अभिजित एक साथ है, हर शहर अपने स्थानीय समय में। "एक मुहूर्त" वाला खाना देखिए। मार्च और सितंबर के आसपास यह लंबाई सब शहरों में लगभग बराबर रहती है, पर जून और दिसंबर के आसपास उत्तर और दक्षिण के शहरों में साफ़ अलग दिखती है। अगर आज बुधवार है, तो तालिका अगले दिन के समय दिखाती है, और यह बात तालिका के शीर्षक में लिखी रहती है।
| शहर | अभिजित मुहूर्त | एक मुहूर्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 11:43 AM – 12:28 PM | 45 मिनट |
| मुंबई | 11:59 AM – 12:46 PM | 46 मिनट |
| कोलकाता | 10:58 AM – 11:44 AM | 46 मिनट |
| चेन्नई | 11:30 AM – 12:17 PM | 47 मिनट |
| बेंगलुरु | 11:40 AM – 12:27 PM | 47 मिनट |
| अहमदाबाद | 12:01 PM – 12:47 PM | 46 मिनट |
| जयपुर | 11:48 AM – 12:34 PM | 45 मिनट |
| गुवाहाटी | 10:44 AM – 11:30 AM | 45 मिनट |
| लंदन | 12:24 PM – 1:05 PM | 41 मिनट |
| न्यूयॉर्क | 12:18 PM – 1:01 PM | 43 मिनट |
| दुबई | 11:40 AM – 12:26 PM | 46 मिनट |
| सिडनी | 12:13 PM – 1:06 PM | 53 मिनट |
अपने शहर का आज का अभिजित उसके पंचांग पन्ने की "शुभ मुहूर्त" तालिका में मिलेगा, जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लंदन या न्यूयॉर्क। राहु काल वाले पन्ने पर भी, जैसे दिल्ली का राहु काल, आज के शुभ मुहूर्तों में अभिजित छपता है। बाकी शहर मुख्य पन्ने पर हैं।
क्या अभिजित और राहु काल एक साथ पड़ सकते हैं
राहु काल सिर्फ़ शुक्रवार को अभिजित पर पड़ता है। यमगण्ड और गुलिक काल कुछ और दिनों में पड़ते हैं। जब भी ऐसा होता है, तो ठीक आधे हिस्से पर। राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल दिन के आठ बराबर भागों में से एक-एक भाग हैं। इन आठ में से चौथा भाग ठीक दिन के मध्य पर खत्म होता है, और पाँचवाँ वहीं से शुरू होता है। दिन का मध्य अभिजित का भी बीच है। इसलिए इन तीनों में से जो काल उस दिन चौथे या पाँचवें भाग में हो, वह अभिजित के आधे हिस्से को ढक लेता है।
- शुक्रवार: राहु काल अभिजित के पहले आधे हिस्से पर पड़ता है।
- सोमवार: यमगण्ड अभिजित के पहले आधे हिस्से पर पड़ता है।
- रविवार: यमगण्ड अभिजित के दूसरे आधे हिस्से पर पड़ता है।
- मंगलवार: गुलिक काल अभिजित के दूसरे आधे हिस्से पर पड़ता है।
- गुरुवार और शनिवार: इन तीनों में से कोई भी अभिजित पर नहीं पड़ता।
- बुधवार: उस दिन अभिजित छपता ही नहीं।
सोमवार और शुक्रवार को एक दुर्मुहूर्त ठीक उसी क्षण शुरू होता है जब अभिजित खत्म होता है, पर दोनों एक-दूसरे पर चढ़ते नहीं, सिर्फ़ सटे हुए हैं। ये सब अपने-अपने नियम से अलग गिने जाते हैं, और शहर-पन्ने पर हर एक अपने पूरे समय के साथ अलग पंक्ति में छपता है।
विजय मुहूर्त क्या है
विजय मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में से 11वाँ है। यह तब शुरू होता है जब दिन का दो-तिहाई हिस्सा बीत चुका हो, यानी सूर्योदय के 10 मुहूर्त बाद, और सूर्यास्त से 4 मुहूर्त पहले खत्म हो जाता है। इसलिए यह हमेशा दिन के मध्य के बाद पड़ता है, और इसकी लंबाई भी उस दिन के एक मुहूर्त जितनी, यानी अभिजित जितनी, होती है। 12 घंटे के दिनमान में यह सूर्योदय के 8 घंटे बाद शुरू होकर 8 घंटे 48 मिनट बाद खत्म होगा।
शहर के पंचांग पन्ने पर विजय मुहूर्त भी "शुभ मुहूर्त" तालिका में छपता है, और बुधवार समेत हर दिन छपता है।
इससे जुड़े और कौन से समय हैं
सुबह के ब्रह्म मुहूर्त की लंबाई दिन से नहीं, उससे पहले वाली रात से आती है। दिन को आठ बराबर भागों में बाँटने वाला हिसाब चौघड़िया में भी चलता है। पंचांग के बाकी शब्दों के अर्थ शब्दावली में हैं।